मसूरी–देहरादून मार्ग। कोलूखेत-जड़ीपानी मार्ग के समीप वह वन क्षेत्र, जहां कुछ समय पहले आगजनी और कथित अवैध प्लॉटिंग के चलते प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ था, अब एक बार फिर हरियाली की ओर लौटता नजर आ रहा है। कभी वीरान और बंजर दिखाई देने वाला यह इलाका अब बारिश के बाद घने हरे आवरण से ढक गया है।
बताया जाता है कि पूर्व में क्षेत्र में की गई प्लॉटिंग को लेकर वन विभाग ने कार्रवाई की थी। वन भूमि पर बिना अनुमति बनाए गए पुश्तों को भी हटाया गया था। कार्रवाई के बाद लंबे समय तक यह स्थान उजाड़ नजर आता रहा, लेकिन अब प्रकृति ने यहां दोबारा अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस क्षेत्र में पहले वन्यजीवों की आवाजाही हुआ करती थी, वह कुछ समय के लिए पूरी तरह सुनसान हो गया था। अब यहां फिर से हरियाली लौटने के साथ वन्यजीवों की मौजूदगी भी दिखाई देने लगी है। हाल ही में क्षेत्र में हिरण देखे जाने की बात सामने आई है, जिसे स्थानीय लोग प्रकृति के अपने पुराने स्वरूप में लौटने का संकेत मान रहे हैं।
लोगों का कहना है कि हिरणों की वापसी इस बात का प्रमाण है कि यदि जंगल और प्राकृतिक क्षेत्र को मानवीय दखल से बचाया जाए तो प्रकृति खुद को दोबारा संवार सकती है।
हालांकि, क्षेत्र को पूरी तरह पूर्व प्राकृतिक स्थिति में लाने के लिए अभी वन विभाग की ओर से प्रस्तावित पौधरोपण का इंतजार है। पूर्व में वन विभाग के रेंजर द्वारा बरसात के दौरान यहां पौधे लगाए जाने की बात कही गई थी। यदि प्रस्तावित पौधरोपण भी समय पर होता है तो क्षेत्र में हरियाली को और मजबूती मिलने के साथ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार हो सकता है।
कोलूखेत-जड़ीपानी का यह बदलाव फिलहाल एक सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहा है—जहां कभी बंजरपन और वीरानी दिखाई देती थी, वहीं अब हरियाली के बीच हिरणों की मौजूदगी प्रकृति के फिर से सांस लेने की कहानी बयां कर रही है।

