मसूरी। उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल ने मसूरी में रेहड़ी-पटरी वेंडिंग व्यवस्था को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर फैसला सुनाते हुए नगर पालिका परिषद, मसूरी की ओर से की गई सभी कार्यवाहियों को नियमसम्मत और पारदर्शी माना है। न्यायालय ने रेहड़ी-पटरी कमजोर वर्ग कल्याण समिति, मसूरी द्वारा दायर याचिका का निस्तारण कर दिया है।
याचिका में समिति ने टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) के पुनर्गठन, रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों का नए सिरे से सर्वे कराने और मसूरी के माल रोड पर फड़-फेरी लगाने की अनुमति देने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान नगर पालिका परिषद, मसूरी की ओर से अधिवक्ता ललित मिगलानी ने अदालत के समक्ष विस्तृत पक्ष रखते हुए बताया कि पालिका ने स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं विनियमन) अधिनियम के तहत सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया है।
पालिका की ओर से न्यायालय को बताया गया कि नियमों के अनुरूप टाउन वेंडिंग कमेटी का पुनर्गठन और चुनाव संपन्न कराए जा चुके हैं। इसके अलावा पालिका क्षेत्र के सभी पात्र रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों का सर्वे कर उन्हें आधिकारिक वेंडिंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। लाइसेंसधारकों के लिए चिन्हित वेंडिंग जोन भी निर्धारित कर दिए गए हैं, जहां वे व्यवस्थित तरीके से अपना व्यवसाय कर सकते हैं।
नगर पालिका द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए उच्च न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ताओं की सभी न्यायोचित मांगों और शिकायतों का नियमानुसार समाधान किया जा चुका है। इसके बाद न्यायालय ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
फैसले के बाद नगर पालिका परिषद, मसूरी ने इसे नियमों और पारदर्शिता की जीत बताया। पालिका का कहना है कि वह शहर की यातायात व्यवस्था, पर्यटकों की सुविधा, माल रोड के सौंदर्यीकरण और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के हितों के बीच संतुलन बनाकर कार्य कर रही है।
पालिका प्रशासन ने सभी लाइसेंसधारी वेंडरों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित वेंडिंग जोन में ही व्यवसाय करें और मसूरी को स्वच्छ, सुंदर एवं व्यवस्थित बनाए रखने में सहयोग दें। यह फैसला भविष्य में मसूरी की वेंडिंग व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

