नई दिल्ली। पत्रकारों की स्वतंत्रता पर बढ़ते हुए दबाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी भी पत्रकार से उनके खबरों के स्रोत के बारे में पूछताछ नहीं कर सकती। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 19(1) और 22 का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
चीफ जस्टिस ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आजकल बिना किसी ठोस प्रमाण और जांच के पत्रकारों पर केस दर्ज किए जा रहे हैं, और पुलिस अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत भी पत्रकारों को उनके स्रोतों का खुलासा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
इस फैसले के बाद मीडिया जगत में खुशी की लहर है। उल्लेखनीय है कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट, 1978 की धारा 15(2) के तहत पत्रकारों को उनके स्रोतों को गोपनीय रखने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, प्रेस काउंसिल के नियम सीधे तौर पर अदालतों में लागू नहीं होते, फिर भी ये पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अहम हैं।
यह फैसला लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर बढ़ते हुए दबाव को नकारते हुए एक मजबूत संदेश देता है कि पत्रकारिता पर किसी भी तरह का दबाव अस्वीकार्य है।