संविधान दिवस पर स्वदेशी अपनाने का संकल्प:मुख्य अतिथि पुष्पा पाड़ियार का प्रेरणादायक संबोधन

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मसूरी संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने स्वदेशी अपनाने का संकल्प लेते हुए जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का वचन दिया। कार्यक्रम में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर इसका ऐतिहासिक महत्व बताया गया और सभी को संविधान दिवस की बधाई दी गई।

वंदे मातरम् गीत, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय* ने रचा था, स्वतंत्रता आंदोलन के समय देशभक्ति की अदम्य ऊर्जा का प्रतीक बन गया था। लोगों में यह गीत जोश और एकता का संदेश भर देता था। बाद में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा भी प्रदान किया गया। “वंदे मातरम्” का अर्थ है — “मैं अपनी मातृभूमि को नमन करता हूँ।”

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पुष्पा पाड़ियार मौजूद रहीं, जिन्होंने छात्र-छात्राओं को अपने जीवन में संविधान की भूमिका और उसके महत्व के बारे में प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया।

इस कार्यक्रम ने देशभक्ति, संविधान के प्रति सम्मान और राष्ट्र निर्माण की भावना को और भी प्रगाढ़ किया।

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