संविधान दिवस के अवसर पर रस्किन बॉन्ड फ़ाउंडेशन—जो प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड की साहित्यिक धरोहर से प्रेरित संस्था है—ने मसूरी में एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसडीएम मसूरी श्री राहुल आनंद उपस्थित रहे। संवाद के प्रमुख वक्ता अधिवक्ता विदुषी निशंक और आर्यन देव उनियाल थे।
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु था—आज के भारत में संविधान की उपयोगिता, अधिकारों और कर्तव्यों का संतुलन, तथा सामाजिक जीवन में संवैधानिक मूल्यों के वास्तविक पालन पर चर्चा करना।
संवाद की शुरुआत करते हुए अधिवक्ता विदुषी निशंक ने कहा कि उत्तराखंड की पहाड़ी और ग्रामीण महिलाओं का योगदान समाज की प्रगति का मूल आधार है। उनके अनुसार, शिक्षा, कौशल, डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता से महिलाओं का सशक्त होना पूरे समाज में परिवर्तन लाता है। उन्होंने युवाओं में संवैधानिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि “अधिकार दिशा देते हैं, और कर्तव्य उस दिशा को सार्थक बनाते हैं।”
दूसरे वक्ता आर्यन देव उनियाल ने संविधान को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि जब नागरिक पारदर्शिता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने अधिकारों का उपयोग करते हैं, तभी संविधान का वास्तविक उद्देश्य फलित होता है। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार—समानता, न्याय और शिक्षा—को राष्ट्र के सतत विकास का आधार बताया। उनका कहना था कि परिवार, विद्यालय और स्थानीय समाज ही संविधान मूल्यों की सबसे मजबूत नींव हैं।
कार्यक्रम का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि संविधान के आदर्शों और नागरिक कर्तव्यों को समाज के हर हिस्से तक पहुँचाया जाएगा।
रस्किन बॉन्ड फ़ाउंडेशन ने इस पहल के माध्यम से संवैधानिक जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रभावी मंच प्रदान किया।

