उत्तराखंड के फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का निधन, आज हुई अंतिम विदाई

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उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेता और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के वरिष्ठ नेता दिवाकर भट्ट का आज हरिद्वार में निधन हो गया। 79 वर्ष की आयु में उनका जाना राज्य और जनता के लिए अपूरणीय क्षति है। आज उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हरिद्वार और उनके पैतृक गांव में किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राजनीतिक नेता और हजारों नागरिकों ने उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक पृष्ठभूमि

दिवाकर भट्ट का जन्म उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में हुआ। उन्होंने युवावस्था से ही अपने क्षेत्र की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई। 1979 में उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई। UKD का उद्देश्य था पहाड़ी जिलों के लोगों के अधिकारों और विकास की लड़ाई लड़ना, साथ ही हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका

दिवाकर भट्ट राज्य आंदोलन के सबसे सक्रिय नेताओं में रहे। उन्होंने आंदोलन के दौरान कई बार आमरण अनशन और धरने दिए, जिससे आंदोलन को मजबूती और जन समर्थन मिला। उनके नेतृत्व और अदम्य साहस के कारण उन्हें आंदोलन के दौरान “फील्ड मार्शल” की उपाधि मिली। उनके प्रयासों से ही उत्तराखंड 2000 में एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित हो सका।

राजनीतिक जीवन और UKD में संघर्ष

राज्य गठन के बाद भी दिवाकर भट्ट उत्तराखंड के विकास और पहाड़ी इलाकों की समस्याओं के लिए सक्रिय रहे। उन्होंने UKD के माध्यम से कई विधानसभा चुनाव लड़े और देवप्रयाग निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। वह UKD के केंद्रीय अध्यक्ष और पार्टी के महाधिवेशन संयोजक भी रहे।

हालांकि चुनावों में उन्हें कई बार हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके संघर्ष और जनसेवा की छवि जनता के बीच हमेशा मजबूत रही। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस जैसी मुख्यधारा की पार्टियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई और उत्तराखंड के विकास के लिए स्पष्ट नीतियों की मांग की।

मत्री पद और जनहित के कार्य

दिवाकर भट्ट एक समय राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। अपने मंत्रालय में उन्होंने जनहित और पहाड़ी विकास के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। उनके नेतृत्व में कई जनहितकारी परियोजनाएं शुरू हुईं। हालांकि उनकी राजनीतिक यात्रा में चुनौतियाँ भी थीं, फिर भी उनकी पहचान हमेशा एक “आंदोलनी नेता” और पहाड़ी जनता के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में रही।

अंतिम दिन, निधन और विरासत

उम्र के अंतिम वर्षों में दिवाकर भट्ट की सेहत में गिरावट आई। आज उनका निधन हरिद्वार में हुआ। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव और हरिद्वार में किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

दिवाकर भट्ट की विरासत उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और पहाड़ी जनता के प्रति निष्ठा के रूप में हमेशा जीवित रहेगी। उनका जीवन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो दिखाता है कि दृढ़ निश्चय और जनहित के लिए समर्पण से बड़े सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन संभव हैं।

 

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