चकराता, माख्टी पोखरी गांव स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में एकल शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित दस दिवसीय आचार्य प्राथमिक प्रशिक्षण वर्ग का समापन समारोह बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विदुषी निशंक, अधिवक्ता और अध्यक्ष सनराइज एकेडमी, निदेशक स्पर्श हिमालय फाउंडेशन और अध्यक्ष कुसुम कांता फाउंडेशन ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत लोक शिक्षा परिषद देश के दूरदराज़ ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर अद्वितीय कार्य कर रहा है। साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक चेतना को एक साथ बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया, जो निश्चित ही देश को विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर करेगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमित पोखरियाल, प्रबंधक जनसंपर्क, यूकॉस्ट ने राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की गतिविधियों की जानकारी दी और समाज में विज्ञान आधारित सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। पूजा पोखरियाल, प्रबंध निदेशक सनराइज एकेडमी और सचिव मंथन वेलफेयर सोसाइटी ने समाज में शिक्षा की भूमिका और इसके महत्व पर जोर दिया।
इस दस दिवसीय प्रशिक्षण में चकराता, सहिया और कोटि कनासर के 30 महिला आचार्य शामिल हुए। इन केंद्रों को संचालित करने के लिए हर गांव से एक-एक पढ़ी-लिखी महिला को नियुक्त किया गया है, जो बच्चों को संस्कार, बौद्धिक और शारीरिक शिक्षा देती हैं।
एकल अभियान के प्रभारी कुंदन सिंह चौहान ने बताया कि अभियान का उद्देश्य उन बच्चों को शिक्षा प्रदान करना है, जिनके माता-पिता उन्हें अच्छे स्कूलों में शिक्षा नहीं दिला सकते। इसके अलावा, अभियान ग्रामीणों को जैविक खेती, स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रामोथान के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है। पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा की कमी को देखते हुए एकल अभियान देशभर के एक लाख से ज्यादा गांवों में संस्कार केंद्र चला रहा है, जिससे बच्चों को शिक्षा और संस्कार दोनों मिल रहे हैं।
समारोह में सत्यवीर सिंह चौहान (प्रवक्ता), रणवीर सिंह चौहान (पूर्व प्रधान), कार्यक्रम अध्यक्ष अमर सिंह चौहान, और अन्य एकल अभियान के कार्यकर्ता जैसे विशन सिंह (अभियान प्रमुख), महावीर सिंह (शारीरिक प्रमुख) और पिंकी शर्मा (संच प्रमुख) भी उपस्थित थे।