देहरादून में न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित भूमि के अवैध क्रय-विक्रय का बड़ा मामला सामने आया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जमीन खरीदने और बेचने से जुड़े लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मौजा आमवाला तरला स्थित खसरा संख्या 94 ख, 134, 135 और 136 की भूमि पर न्यायालय ने पहले ही खरीद-फरोख्त पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद फर्जी दस्तावेज तैयार कर विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 के माध्यम से रजिस्ट्री कराए जाने की शिकायत सामने आई। पीड़ित पक्ष ने इन रजिस्ट्रियों पर आपत्ति दर्ज कराई है।
प्राथमिक जांच में यह पाया गया कि संबंधित भूमि प्रतिबंधित श्रेणी में आती है और इसका संबंध Pearls Agrotech Corporation Limited (पीएसीएल) से जुड़ी संपत्तियों से बताया जा रहा है। इसके अलावा जमीन का संबंध Golden Forests से संबंधित परिसंपत्तियों से भी होने की आशंका जताई जा रही है, जिन पर पहले से विभिन्न स्तरों पर रोक लागू है।
जांच में सामने आया कि विक्रेता ने भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर पंजीकरण कराया। जबकि भूमि विवादित और न्यायालय के आदेशों के अधीन थी। इसे अदालत के निर्देशों की सीधी अवहेलना माना जा रहा है।
डीएम के निर्देश पर रजिस्ट्रार देहरादून और एसडीएम सदर को विलेखों की पुनः जांच करने के आदेश दिए गए हैं। यदि इन दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज की कार्रवाई हुई है तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने को कहा गया है।
इसके साथ ही, रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 की धारा 83 के तहत कूट रचना कर पंजीकरण कराने के मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सब रजिस्ट्रार कार्यालय देहरादून की भूमिका भी जांच के घेरे में है। प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है और रजिस्ट्रार कार्यालय का व्यापक निरीक्षण भी किया जा सकता है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट कहा है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि लेन-देन किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

