मसूरी: आज विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार, घनानंद घन्ना को उनके असामयिक निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर उनके योगदान को उत्तराखंड की भाषा, बोली और संस्कृति के लिए अपूरणीय बताया गया।
आयोजन के संयोजक और फिल्म निर्देशक, प्रदीप भंडारी ने कहा श्री घन्ना ने कठिन परिस्थितियों में भी हास्य के माध्यम से उत्तराखंडी संस्कृति को देश-विदेश में प्रस्तुत किया। उनके मंच पर आने से ही माहौल में जोश भर जाता था, और उनकी शानदार संवाद अदायगी से दर्शक हंसी के ठहाकों में डूब जाते थे। वे एक ऐसे कलाकार थे जिनका हर कदम हास्य से भरपूर होता था।
प्रसिद्ध हास्य कलाकार घन्ना ने अपने करियर में न केवल लाखों मंच प्रस्तुतियों के साथ ही, बल्कि फिल्मों और एलबम गीतों में भी अपनी कला का लोहा मनवाया। उनके द्वारा अभिनीत प्रमुख फिल्मों में घरजवैं, चक्रचाल, ब्वारी होत यनि, सतमंग्लया और घन्ना भाई एमबीबीएस जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा, लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के विवादित गीत नौछमी नारेणा के सीक्वल नेगी दा यना गीत न गा में उनके अभिनय की भी बहुत सराहना हुई।
मसूरी से उनका विशेष लगाव था। उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक मसूरी शरदोत्सव और पर्वतीय बिगुल सम्मान समारोह में मंचीय प्रस्तुति दी। 2008 में मसूरी की प्रतिष्ठित संस्था पर्वतीय बिगुल ने उन्हें ‘गढ़ गौरव’ सम्मान से नवाजा था।
इस मौके पर उत्तराखंडी संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र रावत,देवी गोदियाल,सूरवीर भंडारी,नरेंद्र पड़ियार,अनिल गोदियाल, पूरण रावत, उज्जवल नेगी, पूरण जुयाल, देवी गोदियाल, देवेन्द्र उनियाल,विजय भंडारी और कमलेश भंडारी समेत कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।
उनकी कला और संस्कृति के प्रति योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा, और वे हमेशा उत्तराखंड की कला और संस्कृति में जीवित रहेंगे।