उत्तराखंड में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा विवाद सामने आया है। केंद्र सरकार की एक वरिष्ठ ग्रुप ‘ए’ गजेटेड महिला अधिकारी ने देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल पर लगातार उत्पीड़न, वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के गंभीर आरोप लगाए हैं।
महिला अधिकारी, जो वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था में कार्यरत हैं, ने 31 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री को भेजी अपनी शिकायत में कहा है कि आपातकालीन प्रावधानों का गलत इस्तेमाल करते हुए कैंटोनमेंट बोर्ड का वाहन जबरन अधिग्रहित किया गया। जबकि उस समय सरकारी और निजी व्यावसायिक वाहन आसानी से उपलब्ध थे।
शिकायत के अनुसार, यह आदेश सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया और शनिवार की शाम असाधारण जल्दबाज़ी में लागू किया गया। इस कार्रवाई में एडीएम, सीडीओ, आरटीओ और पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई, जिससे कथित “आपात स्थिति” की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
महिला अधिकारी ने अपने पत्र में पहले की घटनाओं का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जुलाई 2025 में मात्र 15 दिनों के भीतर दो बार पंचायत चुनाव ड्यूटी सौंपी गई, वह भी बिना किसी प्रशिक्षण के। इसके अलावा, उन्हें एक कनिष्ठ अधिकारी के अधीन रिपोर्टिंग के लिए बाध्य किया गया, जिसे उन्होंने जानबूझकर अपमानित करने की कोशिश बताया है।
इस पूरे मामले को महिला अधिकारियों की गरिमा, कानून के शासन और केंद्र–राज्य संस्थागत संतुलन के लिए खतरा बताते हुए अधिकारी ने या तो जिलाधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई या फिर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी पूछा है कि उनकी पूर्व शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस प्रकरण से रक्षा मंत्रालय को भी अवगत करा दिया है।

